हाल ही में, दुनिया की नंबर वन टेनिस खिलाड़ी सेरेना विलियम्स ने ट्विटर पर अपनी कुछ तस्वीरें साझा की| ये तस्वीरें सेरेना ने अपनी प्रेग्नेंसी के दौरान वैनिटी फेयर नाम की मैगज़ीन के कवर पेज के लिए खिंचवायी थी| तस्वीर में सेरेना ने अपने दाएं हाथ से अपने स्तन को छुपा रखा है। वहीं कमर में उन्होंने पतली कमरबंद पहन रखी है और उनका बेबी बंप पूरी तरह से ऊभरा हुआ दिखाई दे रहा है। सेरेना के बाल खुले हुए है जिनमें वे बेहद खूबसूरत दिख रही हैं।

सेरेना टेनिस में अपने बेजोड़ प्रदर्शन और प्रभावशाली व्यक्तित्व के लिए दुनियाभर में जानी जाती है|

न्यूड फोटोशूट में प्रेग्नेंट सेरेना की इन तस्वीरों ने उन्हें एकबार फिर सुर्ख़ियों में ला दिया है| ट्विटर में जब सेरेना ने जब ये तस्वीरें साझा की तो दुनियाभर के लोगों ने इसपर अपनी-अपनी प्रतिक्रिया देना शुरू किया, जिनमें कुछ ने इन तस्वीरों की सराहना की तो कुछ ने आलोचना|

सेरेना टेनिस में अपने बेजोड़ प्रदर्शन और प्रभावशाली व्यक्तित्व के लिए दुनियाभर में जानी जाती है| और जितनी बेबाक वो अपने कार्यक्षेत्र में है उतनी ही अपनी निजी जीवन में भी है| इसी तर्ज पर, उन्होंने समाज की दकियानूसी परंपरा (जिसके तहत प्रेग्नेंट महिला को अपने घर तो क्या अपने घर के बड़े या पुरुष सदस्यों के सामने जाने से ‘शर्म’ के लिहाज से मना किया जाता है|) को तोड़ते हुए किसी महिला के जीवन के सबसे बेहतरीन पलों को सभी के सामने बेबाकी से दर्शाया है|

वैनिटी फेयर मैगज़ीन के कवर पेज पर सेरेना विलियम्स की तस्वीर

आधुनिकता के इस दौर में हमारे समाज में किसी भी स्वस्थ स्त्री की जगह ‘स्लिम’ स्त्री ने ले रखी है, जिसकी तर्ज पर स्त्री की सुंदरता के संदर्भ में समाज ने शर्म, लिहाज, परंपरा और संस्कृति के नामपर सुंदरता की एक परिभाषा गढ़ी है और जब कभी भी कोई स्त्री इस बनायी गयी सुंदरता की परिभाषा की सीमारेखा लांघती है तो उसे समाज की तमाम तरह की आलोचनाओं का लगातार शिकार होना पड़ता है|

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गौरतलब है कि परंपरा और आधुनिकता दो ऐसे विषय है जिनपर समाज में हमेशा चर्चा बनी रहती है| इससे संबंधित विषय या मुद्दे भले बदल जाए लेकिन इनके मूल में कोई ख़ास बदलाव नहीं होता है| पर यहाँ उल्लेखनीय है कि परंपरा और आधुनिकता के संदर्भ में सबसे ज्यादा सवाल स्त्री के ही संदर्भ में उठते हैं – स्त्री के संदर्भ में और उसके साथ पुरुष के रिश्तों के संदर्भ में| एक आधुनिक होता हुआ पुरुष आलोचना-प्रत्यालोचना का विषय नहीं बनता| पहले कभी बनता था, जब अखबर इलाहाबादी ने लिखा था कि ‘कटी उम्र होटलों में, मेरे अस्पताल जा कर|’ लेकिन अब पुरुष की आधुनिकता सर्वस्वीकृत हो चुकी है| अब तो आधुनिकता की मांग तो स्त्री से भी की जाने लगी है| आज समाज के हर क्षेत्र में स्त्री अपना परचम लहरा रही है लेकिन इसके बावजूद हमारा पितृसत्तात्मक उन्हें स्वीकार करने में हिचकता है और यह कहीं से भी समाज में स्त्री की स्वतंत्रता के सम्मान को नहीं दर्शाता है| यहाँ समाज की योजना यह है कि स्त्री दिखे तो आधुनिक, पर रहे परंपरावादी| तभी गैर-बराबरी के उन रिश्तों को कायम रखा जा सकता है, जिनकी बुनियाद पर हमारी सभ्यता का भीतर से खदबदाता महल खड़ा है|

वैनिटी फेयर मैगज़ीन में सेरेना विलियम्स

लेकिन इन सबके बावजूद यह ज़रूरी है कि समाज में स्त्री के संदर्भ में सुंदरता, परंपरा, शर्म और लिहाज जैसे शब्दों में समेटी गयी तमाम वर्जनाओं को तोड़ते हुए समानता और स्वतंत्रता के नये प्रतिमान गढ़े जाए और इस तर्ज पर दुनियाभर की महिलाएं लगातार आगे बढ़ती दिखाई पड़ रही है| सेरेना विलियम्स से पहले भारत में भी हाल ही में प्रिया मलिक ने भी अपने एक फोटोशूट के ज़रिए स्त्री के इस स्वरूप को उजागर किया था|

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