हर मौसम की तरह बारिश का भी ये मौसम सभी के लिए काफी मिला-जुला होता है| हर किसी के लिए इसके अलग-अलग रंग होते है| किसी के लिए ये सुहावना होता है तो किसी के लिए परेशानी भरा पर कुछ लोगों के लिए ये तबाही वाला मौसम होता है| जी हाँ, बारिश का ये रंग उनलोगों के लिए तबाही वाला होता जिनके पास रहने के लिए पक्का मकान नहीं या फिर जिनके घर नदियों या बाँध के आस-पास होते है| इस बारिश में भी हमारे देश के कई क्षेत्र इस तबाही से प्रभावित हो रहे है और कई प्रभावित होने को है अगर समय रहते उनके लिए पुख्ता इंतजाम नहीं किया गया| इन्हीं क्षेत्र में से एक है – मध्यप्रदेश में सरदार सरोवर बाँध|

अच्छे दिनों के राज में यूँ तो यह बाँध मीडिया ज्यादा सुर्ख़ियों में नहीं है लेकिन इस तकनीकी युग में भला कैसे कोई आवाज़ दब सकती है और ये खबर धीरे-धीरे जन मानस तक पहुंच रही है कि देश की जानी-मानी सामाजिक कार्यकर्ता मेधा पाटकर (जिन्हें ‘नर्मदा की नायिका’ के नाम से भी जाना जाता है) बीते 27 जुलाई से मध्यप्रदेश में सरदार सरोवर बाँध प्रभावितों के लिए मुआवज़े और विस्थापितों के पुनर्वास की मांग को लेकर बारह दिनों तक अनशन पर बैठी हुई थी पर मेधा और उनके साथी को पुलिस ने प्रदर्शन स्थल से हटा दिया| उन्हें और उनके साथियों को इंदौर, बड़वानी और धार के अलग-अलग अस्पतालों में भर्ती कराया गया| इसपर प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया है न कि गिरफ्तार किया गया है| नर्मदा बचाओ आंदोलन से जुड़े लोगों का आरोप है कि इस दौरान पुलिस ने लाठीचार्ज भी किया जिसमें कई लोग घायल हुए है|

पुर्नवास की व्यवस्था वास के लायक नहीं

इनदिनों नर्मदा में जलस्तर 121.90 मीटर पहुंच गया है और 123 मीटर पर खतरे का निशान निर्धारित है| सरदार सरोवर बाँध से 192 गाँव के चालीस हजार परिवार प्रभावित होंगे| उनका पूरा इलाका इससे प्रभावित होका डूब जायेगा| मध्यप्रदेश नर्मदा घाटी विकास प्राधिकरण के अनुसार सरदार सरोवर बाँध से प्रभावित मध्यप्रदेश के करीब 6,500 परिवार अब भी इस बाँध के कैचमेंट इलाके में रह रहे है| सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में कहा था कि 31 जुलाई तक पूरी तरह पुनर्वास के बाद ही बाँध की ऊंचाई बढ़ायी जाए| पर अभी पुनर्वास के लिए जो जगह बनाई गयी है वह बिल्कुल भी रहने लायक नहीं है|

अनशन स्थल से हटाए जाने से पहले मेधा ने अपने संदेश में सरकार के इरादे पर सवाल उठाए| उन्होंने कहा कि-

‘आज मध्य प्रदेश सरकार हमारे 12 दिन के अनशन पर बैठे हुए 12 साथियों को गिरफ्तार करके जवाब दे रही है| ये अहिंसक आंदोलन का कोई जवाब नहीं है| मोदी जी के राज में, शिवराज जी के राज में एक गहरा संवाद  नहीं हुआ, जो कुछ हुआ उस पर जवाब नहीं आया| आंकड़ों का खेल, कानून का उल्लंघन और केवल बल प्रयोग जो आज पुलिस लाकर और कल पानी लाकर करने की इनकी मंशा है, इसे हम देश में गांधी के सपनों की हत्या मानते हैं| बाबा साहेब के संविधान को भी न मानने वाले लोग राज पर बैठे हैं|

ये लोग गांवों की, किसानों की, मजदूरों की, मछुआरों की कोई परवाह नहीं करते हैं| ये इस बात से स्पष्ट हो रहा है| पहले अनशन तोड़ो फिर बात करो, ये हम कैसे मंजूर कर सकते हैं| एक तरफ मुख्यमंत्री खुद कर रहे हैं कि ट्रिब्यूनल का जो फैसला है उस पर अमल पूरा हो चुका है| दूसरी तरफ कहते हैं कि अनशन तोड़ो फिर बात करेंगे| अब अहिंसक आंदोलन को चोटी पर ले जाना होगा और जवाब समाज को देना पड़ेगा| नर्मदा घाटी में प्रकृति साथ दे रही है| गुजरात पानी से लबालब भरा है| यहां पानी नहीं भरा है, लेकिन कल क्या होगा कौन जाने|

12 अगस्त को मोदी जी ने अगर इस मुद्दे पर महोत्सव मनाया और जश्न मनाया| वो भी साधुओं और 12 मुख्यमंत्रियों के साथ तो उनकी सरकार और उनकी पार्टी किस प्रकार से विकास को आगे धकेलना चाहते हैं ये जो देश में कोने-कोने में संघर्ष पर उतरे साथी कह रहे हैं वहीं बात अधोरेखित हो जाएगी. हम इतना ही चाहते हैं कि ‘नर्मदा से हो सही विकास, समर्पितों की यही है आस’| ये हमारा नारा आज केवल नर्मदा घाटी के लिए नहीं है| देश में कोई भी अब विस्थापन के आधार पर विकास मान्य न करे, विकल्प ही चुने| यही हम चाहते हैं|’

आधुनिकता का तमगा लिए विकासशील हमारा मीडिया आज जन सरोकार से पूरी तरह ताल्लुक तोड़ता हुआ दिखाई पड़ता है|

ट्विट वाला मंत्री खेल

हाल ही में, प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने ट्वीट करके कहा कि मैं संवेदनशील व्यक्ति हूं| चिकित्सकों की सलाह पर मेधा पाटकर और उनके साथियों को अस्पताल में भर्ती कराया गया, गिरफ्तार नहीं किया गया है| उन्होंने कहा कि मेधा पाटकर और उनके साथियों की हालत चिंताजनक थी| इसलिए ये कदम उठाया गया| साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि विस्थापितों के पुनर्वास के लिए प्रदेश सरकार ने नर्मदा पंचाट व सुप्रीम कोर्ट के आदेश के पालन के साथ 900 करोड़ रुपये का अतिरिक्त पैकेज देने का काम किया|

वहीं उमा भारती ने मेधा को अपने ट्वीट में लिखा कि मेधाजी, मैं आपका बहुत सम्मान करती हूं, आप मेरी गुरु हो। मैं आपके लिए चिंतित हूं और आपसे अनुरोध करती हूं कि अपना अनशन तोड़िये। हम आपके उठाये गए मुद्दों पर यथासंभव प्रयास कर रहे हैं। उमा के इस ट्वीट के जवाब में मेधा ने लिखा कि हम भी आपका बहुत सम्मान करते हैं। नर्मदा नदी को बचाने की लड़ाई में आप हमारे साथ दें।

वाकई यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि आधुनिकता का तमगा लिए विकासशील हमारा मीडिया आज जन सरोकार से पूरी तरह ताल्लुक तोड़ता हुआ दिखाई पड़ता है| सालों से एक महिला जिसने अपना पूरा जीवन नर्मदा बचाओं आंदोलन के नाम कर दिया है आज लोगों की वाजिब मांग को लेकर अनिश्चितकाल के लिए अनशन पर बैठी रही लेकिन न तो किसी चैनल का कैमरा उस दिशा में घूमा न पत्रकार की कलम पर आज जब उन्हें अनशन स्थल से सरकार ने हटाया तो देश का मीडिया पूरी तरह उस तरफ घूम गया|

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