ऑल इंडिया दलित महिला अधिकार मंच (एआईडीएमएएम) की शुरुआत दलित मानवाधिकार के राष्ट्रीय अभियान से हुई थी, जो वर्तमान समय में दलित महिलाओं से जुड़े मुद्दों पर काम कर रही है| एआईडीएमएएम सरकार व कानून के ज़रिए राष्ट्रीय स्तर पर दलित महिलाओं के नेतृत्व को बढ़ावा देने का काम कर रही है|

फेमिनिज्म इन इंडिया (FII) की हिंदी संपादिका स्वाती को उत्तर प्रदेश राज्य की एआईडीएमएएम की राजकीय समन्विका शोभना स्मृति से इंटरव्यू करने का अवसर मिला|

स्वाती: आल इंडिया दलित महिला अधिकार मंच (एआईडीएमएएम) से जुड़कर काम करने की प्रेरणा आपको कहाँ से मिली?

शोभना: मैं अक्सर अपने कुछ साथियों के साथ दलित मानवाधिकार के राष्ट्रीय अभियान में हिस्सा लेने जाया करती थी| वहां जाने के बाद एक तरफ जहाँ मैंने दलितों के साथ होने वाली कई वीभत्स घटनाओं के बारे में जाना| वहीं दूसरी तरफ डॉ भीमराव आम्बेडकर और सावित्रीबाई फुले के विचारों ने मुझे बेहद प्रभावित किया, जिसके बाद साल 2010 में मैं एआईडीएमएएम से जुड़ी और तब से लेकर आजतक हरदिन मुझे अपने इस काम को ज़ारी रखने की प्रेरणा मिलती है|

स्वाती: तमाम अधिकारों व कानूनों के बावजूद दलितों के साथ दुर्व्यवहार की खबरें आती है, जिससे साफ़ है कि आज़ादी के सालों बाद भी समाज में दलितों की हालत में ज्यादा सुधार नहीं हुआ है| आल इंडिया दलित महिला अधिकार मंच (एआईडीएमएएम) इस दिशा में सुधार के लिए क्या-क्या प्रयास कर रहा है?

शोभना: बिल्कुल सही कहा आपने| मौजूदा समय में यों तो हमारे कानून से लेकर अलग-अलग सरकार भी दलितों के विकास और सुरक्षित अधिकार के परिपेक्ष्य में ढ़ेरों योजनाएँ और कानून बनाती है लेकिन वास्तविकता ये कि इनका लाभ जमीनी स्तर तक नहीं पहुंच रहा है और इसी समस्या को दूर करने की दिशा में एआईडीएमएएम के ज़रिए हम SC/ST एक्ट के बारे में दलितों को जागरूक करना, युवाओं में लीडरशिप की क्वालिटी बढ़ाने का काम, हैंडबिल, पर्चे एवं अन्य माध्यमों से लोगों तक सूचना, वकीलों के अलग-अलग ग्रुप के माध्यम से लोगों की समस्याओं का समाधान करने और उनके अधिकारों के बारे में जागरूक करने के साथ-साथ ‘लीगल हेल्प सेंटर’ स्थापित करने का काम भी किया जा रहा है|

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स्वाती: आपके अनुसार उत्तर भारत में दलित महिलाओं के विकास में कौन-सी समस्याएं रोड़ा बन रही है?

शोभना: उत्तर भारत जितना बड़ा राज्य है, यहाँ की संरचना भी उतनी ही जटिल है और यही जटिलता अपने आपमें एक बड़ी चुनौती है जो सदियों के चली आ रही व्यवस्था में होने वाले किसी भी बदलाव को बर्दाश्त नहीं करती है| जाति के आधार पर होने वाले भेदभाव, पितृसत्तात्मक सोच, दलितों के नामपर तमाम कानून व योजनाओं का जमीनी स्तर पर नदारद होना और इन सबके चलते दलितों का सरकार, कानून और समाज से उठता विश्वास; ये सभी समस्याएं हमारे सामने रोड़ा बन रही है|

गाँव में अभियान के दौरान शोभना

स्वाती: एआईडीएमएएम द्वारा चलाए जा रहे कौशल विकास कार्यक्रम के बारे में कुछ बताएं? इसमें आप किन-किन कौशल-कार्यक्रमों को शामिल करते है?

शोभना: एआईडीएमएएम द्वारा दलित महिलाओं को समाज से सशक्त व सतत रूप से जोड़ने के उद्देश्य से कौशल विकास कार्यक्रम चलाया जाता है| कौशल कार्यक्रम के अंतर्गत हम किशोरियों को सेल्फ स्टडी के लिए सपोर्ट करने का काम, कम्प्यूटर ट्रेनिंग, सेल्फ़ डिफेंस की ट्रेनिंग और लेखन क्षेत्र में आगे बढ़ने की ट्रेनिंग जैसे और भी कई कार्यक्रमों को शामिल किया जाता है|

स्वाती: एआईडीएमएएम के ज़रिए आप किस तरह महिलाओं में लीडरशिप क्वालिटी को बढ़ाने का काम करती है?

शोभना: दलित महिलाओं में लीडरशिप क्वालिटी बढ़ाने के लिए हम डॉ भीमराव आम्बेडकर जैसे कई दलित चिंतकों की विचारधारा पर चर्चा व कार्यशाला के माध्यम से, समाज के अलग-अलग क्षेत्र में युवा लीडरशिप पर केंद्रित फिल्म-विडियो के ज़रिए महिलाओं के सामने उदाहरण पेश करके, महिलाओं को राजकीय व राष्ट्रीय स्तरों पर होने वाले कार्यक्रमों में भागीदारी करवाकर, किशोरियों की योग्यता व कुशलता के आधार पर समूह तैयार कर उन्हें SC/ST एक्ट के बारे में शिक्षित कर टीम बनाकर किसी भी केस की रिपोर्ट तैयार कर पैरोकारी करने जैसे कई और रचनात्मक प्रयास कर रहे है|

स्वाती: एआईडीएमएएम के तहत महिलाओं के लिए आयोजित कार्यशाला और ट्रेनिंग प्रोग्राम के बारे में कुछ बताएं?

शोभना: एआईडीएमएएम की तरफ से अलग-अलग विषयों पर कार्यशाला और ट्रेनिंग प्रोग्राम करवाये जाते है, जिसमें मुख्य तौर पर जेंडर, SC/ST एक्ट, पाक्सो एक्ट और सोशल मीडिया की ट्रेनिंग है| इसके साथ ही, दलित महिलाओं से संबंधित अलग-अलग मुद्दों पर केंद्रित ट्रेनिंग प्रोग्राम और कार्यशाला का आयोजन किया जाता है|

दलित महिलाओं को संबोधित करती शोभना

स्वाती: भविष्य में एआईडीएमएएम की दलित महिलाओं को लेकर क्या योजना है?

शोभना: दलित महिलाएं स्वावलंबी बनें, उनके साथ किसी भी तरह का भेदभावपूर्ण व्यवहार न किया जाये, अलग-अलग कानून एवं सरकारी योजनाओं को सरोकार से जोड़ा जाये और सबसे ख़ास दलित महिलाओं की लीडरशिप क्वालिटी बढ़ाकर समाज की ऊंच-नीच वाली धारणा को बदलने की दिशा पर केंद्रित योजनाओं का क्रियान्वयन किया जायेगा|

स्वाती: आप एआईडीएमएएम की तरफ से महिलाओं को क्या संदेश देना चाहेंगीं?

शोभना: मैं सभी महिलाओं को डॉ भीमराव आम्बेडकर के शब्दों में यह संदेश देना चाहूंगी कि – शिक्षित होकर, संगठित हो और लगातार संघर्ष करो| संघर्ष समाज को नई दिशा देने के लिए और एक नयी मिशाल कायम करने के लिए|

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