एक दौर था जब सर्दियों-गर्मियों की छुट्टी में या किसी भी तीज-त्यौहार की छुट्टियों में हम एक-दूसरे रिश्तेदारों के घर जाते और समय बिताते थे| लेकिन ये सिर्फ समय बिताने तक ही सीमित नहीं था, बल्कि शादी-ब्याह की बात से लेकर अचार-मुरब्बे की रेसिपी तक उसमें साझा की जाती है| एक-दूसरे के विचार-व्यवहार से परिचय होता था| पर अब ये सब गुजरे जमाने की बात हो गयी है, क्योंकि अब तो इन सबकी जगह हमारे व्हाट्सएप्प, फेसबुक या यों कहें कि सोशल मीडिया के फैमिली ग्रुप ने ले ली है, जहाँ घर के बड़े और सोशल मीडिया में सक्रिय सदस्य ग्रुप एडमिन और बाकी मेम्बर हुआ करते हैं|

पर दुर्भाग्यवश फैमिली ग्रुप में वैसी बातें नहीं होती जो साथ वक़्त बिताने के दौर के हुआ करती थी| हमारी भारतीय संस्कृति को हम हमेशा दुनिया की सबसे अच्छी संस्कृति मानते है और जिसका मूलाधार ‘वसुधैव कुटुम्बकम’ जैसे विचार को बताते है, जो साफ़ और सीधे तौर पर परिवार व भाईचारे की भावना को बढ़ावा देता है| लेकिन आज जब हम और आप अपने सोशल मीडिया वाले फैमिली ग्रुप में अपने चाचा, मामा, फूफा या अन्य किसी रिश्तेदार के मेसेज को देखते हैं तो उनमें महान संस्कृति वाली बात के इतर करीब सभी बातें देखने को मिल जाती है| आज मैं अपने लेख के माध्यम से आजकल फैमिली ग्रुप में अपने बड़े-बूढ़े और रिश्तेदारों की तरफ से शेयर किये जाने वाले कुछ उन चुनिन्दा भद्दे जोक्स के बारे बात करने जा रही हूँ, जो महिलाओं के प्रति व उनसे बनाये जाने वाले रिश्ते के प्रति की अपनी घिनौनी सोच को साझा करते हैं|

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शादी की पवित्रता पर ‘धब्बेदार रिश्तेदारी मेसेज’

अपनी भारतीय संस्कृति में मजहब चाहे जो भी हो लेकिन शादी को हर जगह पवित्र रिश्ता माना जाता है| खासकर महिला-पुरुष के बीच के संबंधों को वैध करार देने के लिए| हमारे धर्म ग्रन्थों से लेकर पुरुषार्थों की पूर्ति तक की परिक्रमा शादी की धुरी पर महिमामंडित की गयी है| कोई भी हवन-पूजन हो या ज़िन्दगी जीने की बात शादी वाले साथी का होना ज़रूरी माना जाता है| सिनेमा से लेकर डेली सोप वाले सीरियल तक में इसकी झलक साफ़ देखी जा सकती है, जिसने शादी की वाहवाही इस कदर की है हम ये मान लेते है कि ‘हमारे यहाँ बच्चे सेक्स करने से नहीं बल्कि शादी करने से पैदा होते है|’ खैर ये तो हुई बातों की बात लेकिन रिश्तेदार जब इस शादी पर बने भद्दे जोक्स शेयर करने लगे तो फिर शादी के लिए अपनी बिरादरी-ओहदे के वर-वधु खोजकर शादी की अगुवाई करना और बच्चों की ज़िन्दगी के लिए शादी को ज़रूरी बताने वाली बात बेहद खोखली मालूम होती है और कहीं न ये हमारे समाज की सड़ी हुई सोच का दोहरापन ही दिखाता है|

लड़कियों के स्वभाव को ‘लालच भाव’ में समेटने की साजिश

इन्हीं फैमली ग्रुप में अक्सर ऐसे जोक्स भी देखने को मिल जाते है जो लड़कियों को लालची, घमंडी और समाज की तथाकथित चरित्रहीन वाली परिभाषा में समेटने की कोशिश करते हैं| बॉयफ्रेंड को लेकर बनने वाले ज्यादातर जोक्स में लड़कियों को लालची दिखाया जाता है| वहीं दूसरे तरफ लड़के को बेचारा-असहाय| इतना ही नहीं, लड़कियों की यौनिकता से लेकर अपने लिए साथी चुनने तक की बात को हमेशा नकारात्मक तरीके से इन जोक्स में परोसा जाता है| गौरतलब है कि ये जोक्स हमारे उन रिश्तेदारों की तरफ से भेजे जाते है जो खुद को पढ़ा-लिखा और आधुनिक होने का दावा करते हुए लैंगिक-समानता और महिला आज़ादी की पैरवी करते है|

‘हमारे यहाँ बच्चे सेक्स करने से नहीं बल्कि शादी करने से पैदा होते है|’

पत्नी का नकारात्मक छवि

फैमिली ग्रुप्स में शेयर किये जाने वाले जोक्स में एक बड़ी तादाद पत्नियों के खिलाफ होती है| इन जोक्स में हमेशा पत्नी को क्रूर, लालची, शिकायत करने वाली और अशांति फैलाने वाली बताया जाता है| इन जोक्स में पत्नी को हमेशा एक अनचाही बला की तरह दिखाया जाता है, जिससे उसका पति पीड़ित होता है| इतना ही नहीं, उसे अलौकिक समस्याओं के तौर पर पापों के फल की तरह दिखाया जाता है| इन जोक्स में पत्नियों के किरदार में हम महिलाओं को हमेशा ‘वस्तु’ की तरह प्रस्तुत करती है और इस वस्तु की ख़ास बात ये है कि ये सभी के लिए ज़रूरी बताई गयी है लेकिन उसकी नकारात्मक परिभाषा हम उसके स्वाभाविक गुण के तौर पर बताते है|

फैमिली ग्रुप्स के अश्लील व्हाट्सएप्प मेसेज – एक विश्लेषण

कितना अजीब है न ऐसे जोक्स का उस फैमली में ग्रुप्स में लाइक और शेयर किया जाना, जहाँ हम पत्नी की कल्पना अर्धनारीश्वर के तौर पर करते है| उसी पत्नी के लिए आधुनिकता के इस दौर में भी  पति के नामपर ढ़ेरों व्रत की विधि बताते है| इतना ही नहीं, परिवार, नाते और रिश्तेदार के धागों में सिर्फ एक महिला के पत्नी किरदार से पिरोये जाते है| लेकिन अपनी बातों में हम उसकी परिभाषा सिर्फ अपने भद्दे जोक्स तक सीमित रखते है|

ये जोक्स हमारे उन रिश्तेदारों की तरफ से भेजे जाते है जो खुद को पढ़ा-लिखा और आधुनिक होने का दावा करते हुए लैंगिक-समानता और महिला आज़ादी की पैरवी करते है|

ऐसा संभव है कि आप मेरे इस लेख में फैमिली ग्रुप्स में शेयर किये जाने वाले इन जोक्स पर किये गये विश्लेषण को सिर्फ ये कहकर नकार दें कि ‘ये तो मज़ाक है, जिसे गंभीरता से नहीं लिया जाता है|’ बिल्कुल मैं आपकी इस बात से सहमत होंगी| लेकिन यहाँ आपको भी इसबात पर गौर करना होगा कि हम अपने जोक्स में कौन-सी बातें करते हैं? उल्लेखनीय है कि मनोवैज्ञानिकों का यह मानना है कि अपने मज़ाक में हम अक्सर वो बातें कहते हैं जो वास्तव में हम सोचते हैं, लेकिन अनुकूल वातावरण न मिलने की वजह से वो विचार हमारे मन में दबे रह जाते है| और वही फिर अनुकूल वातावरण मिलते ही हमारे मज़ाक के रूप में सामने आते है|

ऐसे में, आप इस बात को नकार नहीं सकते हैं कि बड़ी तादाद में महिलाओं के प्रति नकारात्मक और संकीर्ण छवि गढ़ने वाले ये जोक्स और इन्हें पढ़ने, लाइक और शेयर करने वाले लोगों की दोहरी सोच को दिखाते हैं| आज जब हम लैंगिक समानता की कल्पना करते हैं और अपने रोजमर्रा के जीवन में इसे लागू करने की कोशिश करने में जुटे है, ऐसे में ये बेहद ज़रूरी है कि हम इस तरह से भद्दे विचारों वाले जोक्स या मेसेज का विरोध करें| चूँकि ये जोक्स ज्यादातर हमारे फैमिली ग्रुप्स में शेयर किये जाते है इसका ये कतई मतलब नहीं है कि इसे वैध माना जायेगा| बल्कि इसके विपरीत ये शर्म की बात है कि जो परिवार हमें माँ-बहन-बेटी-बहु की इज्जत, जीवन और समानता का पाठ पढ़ाता है वही आज इस तरह के विचारों को बढ़ावा दे रहा है|

बदलाव के संदर्भ में अक्सर कहा जाता है कि अगर आप समाज में कोई बदलाव देखना चाहते है तो उसकी शुरुआत आप अपने जीवन- अपने परिवार से करिए| इसी तर्ज पर, अगर आप भी लैंगिक समानता का समर्थन करते हैं तो ज़रूरी है कि ऐसे जोक्स और मेसेज का विरोध करें क्योंकि ये सभी छोटी-छोटी बातें अप्रत्यक्ष तौर पर हमारे विचार को सीधा प्रभावित करती है|

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