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दिसंबर 2002 में यूएनएड्स संगठन ने यह अनुमान लगाया था कि विश्व में हर साल गर्भधारण करने वाली 200 मिलियन महिलाओं में से करीब 2.5 मिलियन महिलाएं एचआईवी बाधित होती हैं, प्रभावी रोकथाम उपायों की कमी में माँ से शिशु को होने वाले एचआईवी के प्रसार के जोखिम के बारे में यह भी कहा गया है कि प्रसव पूर्व/ प्रसव केन्द्रों और एचआईवी की रोकथाम के स्वास्थ्य केन्द्रों और प्रजनन स्वास्थ्य और परिवार कल्याण सेवाओं के माध्यम से यह सुनिश्चित किया जाए कि ‘महिलाओं को अपनी एचआईवी की स्थिति को जानने या न जानने का अधिकार हो, उन्हें अपनी प्रजननशीलता को नियंत्रित करने की छूट हो, वे सुरक्षित और क़ानूनी गर्भसमापन सेवाओं के माध्यम से गर्भसमापन करवा सकें और अगर वे एचआईवी बाधित हों और सन्तान पैदा करना चाहें तो माँ से शिशु को होने वाले संक्रमण की रोकथाम के लिए उपलब्ध दवाओं और दूसरी चिकित्सा सुविधाओं का पूरा लाभ उठा सकें|

माँ से शिशु को होने वाले एचआईवी संक्रमण अनेक सरकारी नीतियों का प्रमुख अंग बन गया है और धनदाताओं ने माँ से शिशु को होने वाले संक्रमण की रोकथाम के लिए चलाए जा रहे कार्यक्रमों के लिए दी जाने वाली धनराशि में बहुत अधिक बढ़ोतरी की है| एचआईवी के संदर्भ में गर्भनिरोधक उपायों पर किये गये शोध से पता चलता है कि करीब सभी गर्भनिरोधक उपाय एचआईवी बाधित महिलाओं के लिए भी प्रभावी होते हैं, हालांकि कई सवाल ज्यों के त्यों बने हुए हैं, जैसे कि  हॉर्मोन्स आधारित गर्भनिरोधकों के बारे में और एचआईवी के प्रसार और इसकी वृद्धि से संबंधित सवाल|

प्रजननशीलता आयु की महिलाओं में एचआईवी के अधिक प्रसार वाले बहुत से देशों से अधिकाँश महिलाओं को सुरक्षित गर्भसमापन की सुविधा नहीं मिल पाती|

यहाँ यह जानना ज़रूरी है कि गर्भावस्था के परिणामों पर चर्चा करते हुए बहुत से शोधकर्ता अपनी इच्छा से कराए गये गर्भसमापन और खुद होने वाल गर्भसमापन के बीच अंतर नहीं करते| जिन देशों में गर्भसमापन कानून बहुत कड़े हैं वहां संभव है कि बहुत से अस्पतालों में कराये जाने वाले गर्भसमापन की घटनाओं को मिसकैरेज या खुद होने वाले गर्भसमापन के रूप में दर्ज किया जाता हो ताकि बाद में अस्पतालों के आंकड़ों का अध्ययन करने वाले शोधकर्ताओं को पर्याप्त आंकड़े न मिल पायें|

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गर्भधारण के कारण माँ से शिशु को होने वाले एचआईवी संक्रमण को कम करने का समर्थन करने के लिए यूएनएड्स और दूसरे संगठनों ने यह सिफारिश की है कि प्रसव पूर्व जांच केन्द्रों में आने वाली गर्भवती महिलाओं को स्वैच्छिक आधार पर एचआईवी जांच व परामर्श सेवाएं दी जानी चाहिए| फिर भी जहाँ इस तरह की नीतियाँ है वहां पर भी संभव है कि गर्भसमापन और इसके बाद की देखभाल के लिए आने वाली महिलाओं को एचआईवी की जांच और परामर्श सेवाएं न दी जाती हों|

गर्भावस्था के परिणामों पर चर्चा करते हुए बहुत से शोधकर्ता अपनी इच्छा से कराए गये गर्भसमापन और खुद होने वाल गर्भसमापन के बीच अंतर नहीं करते|

विश्व स्वास्थ्य संगठन ने कहा है कि ‘जहाँ गर्भसमापन कराना क़ानूनी और स्वीकार्य हो, वहां महिलाओं को यह विकल्प दिया जा सकता है| बहुत सी महिलाओं को गर्भावस्था के दौरान अपने एचआईवी बाधित होने का पता चलता है और समय रहते जांच परिणाम न मिल पाने के कारण उनका गर्भसमापन नहीं हो सकता| अगर गर्भसमापन का विकल्प उपलब्ध हो तो महिला या उस दम्पत्ति को जानकारी दी जानी चाहिए ताकि वे हर विकल्प को समझकर स्वास्थ्य सेवाप्रदाताओं और परामर्शदाताओं के प्रभाव से मुक्त रहकर अपनी इच्छानुसार निर्णय ले सकें|’ आम महिलाओं की तरह, एचआईवी/एड्स बाधित महिलाओं को भी बलात्कार, गर्भनिरोधक की विफलता, गर्भनिरोधकों के उपलब्ध न होने या साथी के इसका इस्तेमाल न करने जैसे कारणों से भी अनचाहे गर्भ की स्थिति का सामना करना पड़ सकता है|

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वहीं यह जानने के लिए बहुत कम अनुसंधान हुए हैं कि एचआईवी मुक्त महिलाओं की तुलना में एचआईवी बाधित महिलाओं के गर्भसमापन कराए जाने के बाद उन्हें अधिक रोगों का सामना करना पड़ता है| साथ ही यह भी सुझाव दिया जाता है कि एचआईवी बाधित महिलाओं के लिए ऑपरेशन से गर्भसमापन किये जाने की अपेक्षा दवाओं से गर्भसमापन कराना बेहतर विकल्प हो सकता है| पर एचआईवी बाधित महिलाओं को आमतौर पर गर्भसमापन कराने के लिए सुरक्षित विकल्प नहीं मिल पाते| प्रजननशीलता आयु की महिलाओं में एचआईवी के अधिक प्रसार वाले बहुत से देशों से अधिकाँश महिलाओं को सुरक्षित गर्भसमापन की सुविधा नहीं मिल पाती|

एचआईवी बाधित महिलाओं को उनके प्रजनन जीवन पर नियन्त्रण ज़रूर होना चाहिए और यह भी सुनिश्चित किया जाए कि वे अपने इन फैसलों को भी अपनी इच्छा से और सुरक्षित रूप से पूरा कर सकें| मानवाधिकार विषय के संदर्भ में ऐसे प्रयास करने ज़रूरी हैं कि एचआईवी/एड्स बाधित महिलाएं सन्तान उत्पन्न करने या संतानोत्पत्ति के समय का निर्धारण कर पाने के अपने अधिकार का इस्तेमाल कर सकें| जो एचआईवी बाधित महिलाएं संतानोत्पत्ति करना चाहें, उन्हें माँ से शिशु को होने वाले संक्रमण की रोकथाम के कार्यक्रमों के अंतर्गत सेवाएं दी जानी चाहिए| इसके साथ ही, एचआईवी बाधित महिलाओं में, खासकर जिनमें यह संक्रमण बहुत बढ़ चुका हो, गर्भसमापन के बाद होने वाली जटिलताओं के लिए दिए जाने वाले उपचार के बारे में भी शोध कार्य करने की ज़रूरत है|


यह लेख क्रिया संस्था की वार्षिक पत्रिका एचआईवी/एड्स और मानवाधिकार : एक विमर्श (अंक 4, 2009) से प्रेरित है| इसका मूल लेख पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करें|

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तस्वीर साभार : who.int

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