आज क्यूँ ज़रूरी है नारीवाद?

औरतों और पुरुषों को बराबर मानने वाला और उनकी बराबरी के लिए लड़ने वाला हर इंसान फेमिनिस्ट कहलाता है| फेमिनिस्ट विचार यह नहीं है कि सत्ता के ढांचे को पलट दिया जाए बल्कि फेमिनिस्ट विचार यह है कि औरतों और पुरुषों के बीच सत्ता का संबंध ख़त्म हो जाए|
On Defending Feminism

On Defending Feminism

Begum Rokeya: The Writer Who Introduced Us To Feminist Sci-Fi |...

Begum Rokeya was a Bengali writer and activist, who wrote the first feminist science-fiction. She has often been touted as the pioneer feminist of Bengal.

Briefs That Make Women Drool: Objectifying Imagery In Men’s Underwear Ads

Men's underwear ads portray women as carnal creatures who need merely a trigger (the right underwear) to grant sexual access to their bodies.

इसे नारीवाद ही क्यों कहते हैं, समतावाद या मानववाद क्यों नहीं?

नारीवाद पर विश्वास करने वालों को अक्सर इस बहस का सामना करना पड़ता है कि जब ‘नारीवाद’ का मूलभाव समानता है तो इसे ‘मानवतावाद’ या फिर ‘समतावाद’ क्यों नहीं कहा जाता है|

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