लैंगिक समानता : क्यों हमारे समाज के लिए बड़ी चुनौती है? | Feminism In India

लैंगिक समानता : क्यों हमारे समाज के लिए बड़ी चुनौती है?

गाँव हो या शहर व्यवहार से लेकर काम तक लैंगिक समानता हमारे समाज में मौजूद है, जो हमारे देश के लिए एजेंडा 2030 को पूरा करने में बड़ी चुनौती है|
भारत में स्त्री विमर्श और स्त्री संघर्ष: इतिहास के झरोखे से

भारत में स्त्री विमर्श और स्त्री संघर्ष: इतिहास के झरोखे से

भारत में स्त्री संघर्ष और स्त्री अधिकार के आन्दोलन को इसी रूप में स्वतंत्रता आन्दोलन के परिप्रेक्ष्य में देखने की आवश्यकता है|
पितृसत्ता क्या है? – आइये जाने  

पितृसत्ता क्या है? – आइये जाने  

पितृसत्ता एक ऐसी व्यवस्था के रूप में परिभाषित किया जाता है जिसमें पुरुषों का महिलाओं पर वर्चस्व रहता है और वे उनका शोषण और उत्पीड़न करते हैं|
कविता: खेल सी ज़िन्दगी

कविता: खेल सी ज़िन्दगी

न जाने मैं कब इतनी बड़ी हो गयी, खेल-कूद, दौड़-भाग को भूल, जीवन के पतंग की लरी हो गयी
ताराबाई शिंदे: ‘स्त्री-पुरुष तुलना’ से की भारतीय नारीवाद की शुरुआत | #IndianWomenInHistory

ताराबाई शिंदे: ‘स्त्री-पुरुष तुलना’ से की भारतीय नारीवाद की शुरुआत | #IndianWomenInHistory

ताराबाई शिंदे की रचना ‘स्त्री-पुरुष तुलना’ में स्त्रियों की गुलाम मानसिकता से मुक्ति दिलाने की प्रेरणा प्रदान करती है| ज़ोरदार सामाजिक क्रांति का संदेश इसमें है| नारीवादी सोच का यह पहला विस्फोट है|
महादेवी वर्मा: नारी-चेतना की ‘अद्वितीय विचारक’ | #IndianWomenInHistory

महादेवी वर्मा: नारी-चेतना की ‘अद्वितीय विचारक’ | #IndianWomenInHistory

हिंदी साहित्य के छायावादी युग की प्रसिद्ध और प्रतिष्ठित कवियत्री महादेवी वर्मा की गद्य एवं पद्य की रचनाओं से उनके व्यक्तित्व के दो पहलू देखने को मिलते हैं|
औरतों की अनकही हसरतें खोलती है लस्ट स्टोरी | Feminism In India

औरतों की अनकही हसरतें खोलती है ‘लस्ट स्टोरी’

लस्ट स्टोरी समाज के अलग-अलग तबके में आधी आबादी के उस आधे किस्से को बयाँ करती है जिसे हमेशा चरित्रवान और चरित्रहीन के दायरें में समेटा गया है|
मंटो की वो अश्लील औरतें

मंटो की वो अश्लील औरतें

ऐसे ही झंझावतों वाले दौर में हिंदुस्तानी साहित्य में एक ऐसे सितारे का उदय हुआ, जिसने अपनी कहानियों से अपने समय और समाज को नंगा सच दिखाया। इस लेखक का नाम था- सआदत हसन मंटो।
जेंडर से बनाई जाती है महिलाएं

‘जेंडर’ से बनाई जाती है महिलाएं

‘जेंडर’ सामाजिक-सांस्कृतिक संरचना है, जो स्त्रीत्व और पुरुषत्व के गुणों को गढ़ने के सामाजिक नियम व कानूनों का निर्धारण करता है।
ब्रा

मेरी ब्रा की स्ट्रेप या सेनेटरी नैपकीन देखकर आपको शर्म आती है?

ऐसी सूरत में सलोनी की बात बेहद सटीक लगती है कि "जिंदगी एक ब्रा की तरह हैl" जिसमें न जाने कितनी बुराइयां ढकी हुई है। और जब आज के दौर की युवतियां उन्हें उघाड़ती है, तो समाज को शर्म अती है। तो क्यों न इस समाज को शर्मिंदा होने पर ही मजबूर किया जाए। सच में शर्म हमें नहीं, उन्हें आनी चाहिए।

What's Trending On FII?

Kalank Falls Flat As It Tries To Distract Its Audience With Its Extravagance

Kalank unabashedly glorifies toxic love, co-dependence in the name of marriage, and the male ego.

BJP And Feminism: How Has BJP Been Treating Indian Women?

A party with national prominence such as the BJP totes a venomous religiosity, that has berated the independence and self-reliance of women since the time of its inception.
To Kill a Mockingbird

Gender Roles And Stereotyping In ‘To Kill A Mockingbird’

To Kill a Mockingbird covers several themes that are often uncomfortable to encounter and explore, such as racism and loss of innocence.