Thursday, October 17, 2019
ताराबाई शिंदे: ‘स्त्री-पुरुष तुलना’ से की भारतीय नारीवाद की शुरुआत | #IndianWomenInHistory

ताराबाई शिंदे: ‘स्त्री-पुरुष तुलना’ से की भारतीय नारीवाद की शुरुआत | #IndianWomenInHistory

ताराबाई शिंदे की रचना ‘स्त्री-पुरुष तुलना’ में स्त्रियों की गुलाम मानसिकता से मुक्ति दिलाने की प्रेरणा प्रदान करती है| ज़ोरदार सामाजिक क्रांति का संदेश इसमें है| नारीवादी सोच का यह पहला विस्फोट है|
मंटो की वो अश्लील औरतें

मंटो की वो अश्लील औरतें

ऐसे ही झंझावतों वाले दौर में हिंदुस्तानी साहित्य में एक ऐसे सितारे का उदय हुआ, जिसने अपनी कहानियों से अपने समय और समाज को नंगा सच दिखाया। इस लेखक का नाम था- सआदत हसन मंटो।
इस्मत चुगताई का सेक्सी ‘लिहाफ’

इस्मत चुगताई का सेक्सी ‘लिहाफ’

इस्मत चुगताई उर्फ ‘उर्दू अफसाने की फर्स्ट लेडी’ ने महिला सशक्तीकरण की सालों पहले एक ऐसी बड़ी लकीर खींच दी, जो आज भी अपनी जगह कायम है।
ब्रा

मेरी ब्रा की स्ट्रेप या सेनेटरी नैपकीन देखकर आपको शर्म आती है?

ऐसी सूरत में सलोनी की बात बेहद सटीक लगती है कि "जिंदगी एक ब्रा की तरह हैl" जिसमें न जाने कितनी बुराइयां ढकी हुई है। और जब आज के दौर की युवतियां उन्हें उघाड़ती है, तो समाज को शर्म अती है। तो क्यों न इस समाज को शर्मिंदा होने पर ही मजबूर किया जाए। सच में शर्म हमें नहीं, उन्हें आनी चाहिए।
पितृसत्ता

पितृसत्ता से कितनी आजाद हैं महिलाएं?

हमारे समाज में कई तरह की असमानताएं हैं। स्त्री और पुरुष के बीच असमानता भी उन में से एक है। आम तौर पर पितृसत्ता का प्रयोग इसी असमानता को बनाए रखने के लिए होता है। नारीवादी अध्ययन का एक नया क्षेत्र है। इसलिए नारीवादी विमर्श का पहला काम यही है कि महिलाओं को अधीन करने वाली जटिलताओं और दांवपेच को पहचाना जाए और उसे एक उचित नाम दिया जाए। बीसवीं सदी के आठवें दशक के मध्य से नारीवादी विशेषज्ञों ने ‘पितृसत्ता’ शब्द का प्रयोग किया।
#MeToo: यौन-उत्पीड़न की शिकार महिलाओं की आपबीती  

#MeToo: यौन-उत्पीड़न की शिकार महिलाओं की आपबीती  

#MeToo अभियान के ज़रिए करोड़ों की संख्या में महिलाओं ने सोशल मीडिया में अपनी साथ हुई यौन-उत्पीड़न की घटना के बारे में साझा करना शुरू कर दिया|
9 नारीवादी लेखिकाओं के लेखन से समझें नारीवाद | Feminism In India

9 नारीवादी लेखिकाओं के लेखन से समझें नारीवाद

इन नारीवादी लेखिकाओं ने अपने लेखन के माध्यम से अपने-अपने देशकाल को ध्यान में रखकर नारीवाद की एक वृहत परिभाषा को गढ़ा, जो हमें नारीवाद को समझने में बेहद मददगार साबित होती है|
लड़की सांवली है, हमें तो चप्पल घिसनी पड़ेगी!

लड़की सांवली है, हमें तो चप्पल घिसनी पड़ेगी!

‘मैंने कई बार मां बाप के या परिजनों के मुंह से सुना है, अभागी काली लड़की| उसके इतने अच्छे नाक नक्श हैं, बस गोरी होती| इसके बाद मिलियन डॉलर का ऑफर आता है, कौन एक काली लड़की से शादी करेगा| उसके लिए अच्छा लड़का ढूंढना मुश्किल हो जाएगा|’
गर्व है मुझे कैरेक्टरलेस होने पर – मेरी कहानी | Feminism In India

गर्व है मुझे कैरेक्टरलेस होने पर – मेरी कहानी

अगर रिश्तेदारों के अनुसार लड़कों से दोस्ती करना, विरोध करना या अपनी बात कहना कैरेक्टरलेस होना है तो ‘मुझे गर्व है कि मैं कैरेक्टरलेस हूँ|’
महिलाओं का खतना एक हिंसात्मक कुप्रथा | Feminism In India

महिलाओं का ‘खतना’ एक हिंसात्मक कुप्रथा

महिलाओं में खतना प्रथा का चलन दाऊदी बोहरा मुस्लिम समुदाय में सबसे अधिक देखा जाता है | दाऊदी बोहरा मुस्लिम समुदाय, शिया मुसलमानों माने जाते हैं|

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These Are The 15 Women Who Helped Draft The Indian Constitution/इन 15 महिलाओं ने भारतीय संविधान बनाने में दिया था अपना योगदान

These Are The 15 Women Who Helped Draft The Indian Constitution

On this Republic Day, let us take a look at the fifteen powerful women who helped draft the Indian Constitution.
A Playlist For Anyone Who Wants To Celebrate A Good Or Bad Day

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This playlist is just a personally curated list of songs that I like to listen to on a particularly bad day or just to feel good. I hope you find a song, or better if a song finds you.
Laxmmi Bomb: When Bollywood Tries Too Hard (And Fails) To Be ‘Woke’

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Laxmmi Bomb is categorised as a comedy-horror and according to early promotions is supposed to be a movie about a transgender ghost which takes possession of Kumar’s character.