पीरियड के मुद्दे ने मुझे मर्द होने का असली मतलब समझा दिया

पीरियड के मुद्दे ने मुझे मर्द होने का असली मतलब समझा दिया

पीरियड के मुद्दे पर काम करने से मुझे मर्द होने का असली मतलब समझ आ गया कि मर्द होने का मतलब औरतों से अपनी तुलना करके उनको नीच दिखाना नहीं|
औरत क्यों न अपनाएँ सहज पहनावा? | Feminism In India

औरत क्यों न अपनाएँ सहज पहनावा?

औरत के लिए तय किए गए कपड़े ऊपरी तौर पर तो असुविधाजनक नहीं लगते क्योंकि वो रोज उन्हें पहनकर चलती हैं| लेकिन अगर स्त्री और पुरुष के कपड़ों की तुलना की जाए तो अंतर साफ नजर आता है।
पितृसत्ता

पितृसत्ता से कितनी आजाद हैं महिलाएं?

हमारे समाज में कई तरह की असमानताएं हैं। स्त्री और पुरुष के बीच असमानता भी उन में से एक है। आम तौर पर पितृसत्ता का प्रयोग इसी असमानता को बनाए रखने के लिए होता है। नारीवादी अध्ययन का एक नया क्षेत्र है। इसलिए नारीवादी विमर्श का पहला काम यही है कि महिलाओं को अधीन करने वाली जटिलताओं और दांवपेच को पहचाना जाए और उसे एक उचित नाम दिया जाए। बीसवीं सदी के आठवें दशक के मध्य से नारीवादी विशेषज्ञों ने ‘पितृसत्ता’ शब्द का प्रयोग किया।
‘वो लेस्बियन थी’ इसलिए बीएचयू हास्टल से निकाली गयी | Feminism In India

‘वो लेस्बियन थी’ इसलिए बीएचयू हास्टल से निकाली गयी

बनारस हिन्दू यूनिवर्सिटी के महिला महाविद्यालय (एमएमवी) के हास्टल से एक लड़की को यह कहकर निकाल दिया गया कि वो लेस्बियन थी|
आपात प्रसूति सेवा के रूप में गर्भसमापन

आपात प्रसूति सेवा के रूप में गर्भसमापन

अक्टूबर 2012 का, जब भारत सहित कई देशों में लोगों ने 31 साल की सविता हलाप्पनावर की मृत्यु के विरोध में प्रदर्शन करना शुरू किया|
‘औरत को इतना चुप मत कराओ कि वो बोलना ही भूल जाए|’ Feminism In India

‘औरत को इतना चुप मत कराओ कि वो बोलना ही भूल जाए|’

पितृसत्तात्मक समाज में बचपन से महिलाओं को चुप रहने या यों कि चुप करने की जद्दोजहद की जाती है जिसका सीधा असर महिला के व्यक्तित्व पर पड़ता है|
पदमावत फिल्म के विरोधी बलात्कार पर चुप क्यों रहते हैं? | Feminism In India

पदमावत फिल्म के विरोधी बलात्कार पर चुप क्यों रहते हैं?

पदमावत फिल्म पर युवा-वर्ग का विरोध और लगातार बढ़ती बलात्कार की घटनाओं पर इनकी चुप्पी इस बात को दिखाती है कि युवा सही मुद्दों से भटकर बेतुकी बातों के लिए हिंसा का रास्ता इख्तियार कर रहे है। 
शर्म का नहीं बल्कि विस्तृत चर्चा का विषय हो माहवारी

शर्म का नहीं बल्कि विस्तृत चर्चा का विषय हो माहवारी

भारत में माहवारी के बारे में और इसके शुरू होने के बारे में बहुत कम अध्ययन किये गये हैं जिनमें मुख्य रूप से उम्र, जानकारी और समस्याओं के अनुभवों के आंकड़ें भी मिलते हैं|
अब कागा नहीं पीरियड आयेगा | #ThePadEffect

अब ‘कागा’ नहीं ‘पीरियड’ आयेगा | #ThePadEffect

हमारे समाज में मासिक धर्म पर बात नहीं की जाती है जिससे लड़कियां अपने शरीर से जुड़े तमाम तथ्यों को लेकर कई तरह की भ्रांतियों में जीने लगती है|
यौनिकता युवाओं की शिक्षा का हिस्सा: क्यों और कैसे?

यौनिकता युवाओं की शिक्षा का हिस्सा: क्यों और कैसे? | #WhyCSE

यौनिकता हमारी ज़िंदगी का एक हिस्सा है और हमारा मानना है कि यौनिकता शिक्षा पाना युवाओं का एक अधिकार है जो उनसे नहीं छीना जा सकता।

What's Trending On FII?

“Not Same-sex Sexuality But Modern Homophobia Is The Western Import”: Ruth Vanita

“Not Same-sex Sexuality But Modern Homophobia Is The Western Import”: Ruth Vanita

Ruth Vanita's books broke fresh ground in gender studies by showing that India has a long tradition of same-sex desire.
internalized misogyny

A 101 Introduction To Internalized Misogyny

Unless you’ve been living under a rock, you must have heard the phrase ‘I am not like other girls’ or 'I am not like most girls' somewhere.
How Sexism & Misogyny In Indian Comedy Encourages Gender-based Violence

How Sexism & Misogyny In Indian Comedy Encourages Gender-based Violence

Does Indian comedy has to be sexist and misogynist in order to be funny?