औरतों! खुद पर होने वाली हिंसा को नज़रअंदाज करना दोहरी हिंसा है

औरतों! खुद पर होने वाली हिंसा को नज़रअंदाज करना दोहरी हिंसा है

महिलाएं, पुरुष से स्वीकृति, एक अच्छी औरत बने रहने की फांस, जेंडर आधारित भेदभाव का हिस्सा बनकर वो महिला हिंसा से आंखे चुरा लेती है पर अपने आप को गैरबराबरी के चक्रव्यू में फंसा हुआ पाती है।
महिला सशक्तिकरण की राह में मील का पत्थर साबित हो रहे हैं सामुदायिक रेडियो

महिला सशक्तिकरण की राह में मील का पत्थर साबित हो रहे हैं सामुदायिक रेडियो

सामुदायिक रेडियो का स्वरूप लोकतांत्रिक है जिसमें हर व्यक्ति को बोलने, सुनने और कार्यक्रम बनाने की पूरी छूट है। रेडियो संचार का एक ऐसा माध्यम है जिससे ग्रामीणों के विकास और सशक्तिकरण की राह खुलती है और निरक्षर भी अपनी भागीदारी निभा सकते हैं। ऐसे में जो महिलाऐं पढ़ना-लिखना नहीं जानती रेडियो सुनकर सारी जानकारियाँ पाती हैं।
औरत ही औरत की दुश्मन होती है ? : एक नारीवादी अध्ययन

औरत ही औरत की दुश्मन होती है ? : एक नारीवादी अध्ययन

‘औरत ही औरत की दुश्मन है’ का जुमला एक निरर्थक धारणा है, जेंडर के नियमों को बनाए रखने की साजिश और पितृसत्ता का चक्रव्यू है जो महिलाओं को कमजोर साबित करना चाहता है, महिलाओं की दोस्ती और संगठन को चोट पहुंचना चाहता है।
नेपाल में प्रजनन स्वास्थ्य से जुड़ी युवाओं और किशोरों की अभिलाषाएं

नेपाल में प्रजनन स्वास्थ्य से जुड़ी युवाओं और किशोरों की अभिलाषाएं

नेपाल में किशोरों को अक्सर बेहद निर्धनता, शिक्षा के सीमित अवसर, सीमित स्वास्थ्य सेवाएं और बंधनकारी सामाजिक और यौन मान्यताओं का सामना करना पड़ता है|
दोराहे पर खड़े युवा और उनकी यौनिकता

दोराहे पर खड़े युवा और उनकी यौनिकता

भारत में ऐसी कोई सर्वे रिपोर्ट बेहद सीमित मात्रा में उपलब्ध है, जिससे यह पता चलता है कि कितने युवक-युवतियों के शादी से पहले संबंध रहे है| पर ये सीमित आंकडें कोई पुख्ता तस्वीर सामने लाने के लिए काफी नहीं है|
बोलती औरत से पितृसत्ता डरती है, तभी तो महिला-केंद्रित भद्दी गालियाँ बोलती है!

बोलती औरत से पितृसत्ता डरती है, तभी तो महिला-केंद्रित भद्दी गालियाँ बोलती है!

हर क्रिया के प्रति होने वाले प्रतिक्रिया के तहत महिला-केंद्रित गालियाँ देना, साफ़तौर पर समाज की पितृसत्तात्मक सोच को दर्शाता है, जिसके तहत महिला को न केवल नीचा दिखाया जाता है बल्कि उसके लिए गालियाँ इस्तेमाल करना उसकी पहचान जैसा बताया जाता है|
हम ही से है संविधान

हम ही से है संविधान

भारत जो विविधता का देश माना जाता है और शायद इसी विभिन्नता को केंद्र में रखकर संविधान की उद्घोषणा ‘हम’ से होती है| पर अब सवाल ये है कि क्या वास्तव में ये ‘हम’ इस संविधान के संरक्षण से बच पाया है? या सिलसिलेवार तरीके से इस ‘हम’ से कई विभिन्नताओं का बहिष्कार कर दिया गया है|
लैंगिक दायरों से परे होती है प्यार की परिभाषा

लैंगिक दायरों से परे होती है प्यार की परिभाषा

हमारे यहाँ तो प्रेम कहानियाँ ही लड़का-लड़की वाली गायी जाती है| पर इसका मतलब ये नहीं कि प्यार का दायरा सिर्फ यहीं तक है, वास्तविकता ये है कि प्यार की कहानी लड़का-लड़की तक सीमित सिर्फ इसलिए है क्योंकि समलैंगिक प्रेम कहानियाँ आज भी अंधेरे बक्से में बंद है|
सुसाइड नोट पर प्रतियोगिता करवाने वाले इलाहाबाद यूनिवर्सिटी के छात्रों के नाम खुला खत

‘सुसाइड नोट’ पर प्रतियोगिता करवाने वाले इलाहाबाद यूनिवर्सिटी के छात्रों के नाम खुला खत

कार्यक्रम के तहत 250 शब्दों में सुसाइड लेटर लिखना है। आज तक मैंने ढ़ेरों लेखन प्रतियोगिताओं के बारे में सुना, लेकिन ‘सुसाइड नोट’ किसी लेखन प्रतियोगिता का विषय हो ये पहली बार देख रही हूँ|
जेंडर के ढाँचे में ढलने को कब तक मजबूर रहेगा युवा ?

जेंडर के ढाँचे में ढलने को कब तक मजबूर रहेगा युवा ?

भारत में पुरुष की परवरिश एक पितृसत्तात्मक समाज में होती हैं और महिलाओं के साथ उनका संपर्क बहुत कम होता है| इतना ही नहीं, उन्हें सेक्स के बारे में न के बराबर शिक्षा व जानकारी दी जाती है|

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To Kill a Mockingbird covers several themes that are often uncomfortable to encounter and explore, such as racism and loss of innocence.