ब्रा

मेरी ब्रा की स्ट्रेप या सेनेटरी नैपकीन देखकर आपको शर्म आती है?

ऐसी सूरत में सलोनी की बात बेहद सटीक लगती है कि "जिंदगी एक ब्रा की तरह हैl" जिसमें न जाने कितनी बुराइयां ढकी हुई है। और जब आज के दौर की युवतियां उन्हें उघाड़ती है, तो समाज को शर्म अती है। तो क्यों न इस समाज को शर्मिंदा होने पर ही मजबूर किया जाए। सच में शर्म हमें नहीं, उन्हें आनी चाहिए।
नारीवाद

उफ्फ! क्या है ये ‘नारीवादी सिद्धांत?’ आओ जाने!

नारीवाद के बारे में सभी ने सुना होगा। मगर यह है क्या? इसके दर्शन और सिद्धांत के बारे में ज्यादातर लोगों को नहीं मालूम। इसे पूरी तरह जाने और समझे बिना नारीवाद पर कोई भी बहस या विमर्श बेमानी है। नव उदारवाद के बाद भारतीय समाज में महिलाओं के प्रति आए बदलाव के बाद इन सिद्धांतों को जानना अब और भी जरूरी हो गया है।
पितृसत्ता

पितृसत्ता से कितनी आजाद हैं महिलाएं?

हमारे समाज में कई तरह की असमानताएं हैं। स्त्री और पुरुष के बीच असमानता भी उन में से एक है। आम तौर पर पितृसत्ता का प्रयोग इसी असमानता को बनाए रखने के लिए होता है। नारीवादी अध्ययन का एक नया क्षेत्र है। इसलिए नारीवादी विमर्श का पहला काम यही है कि महिलाओं को अधीन करने वाली जटिलताओं और दांवपेच को पहचाना जाए और उसे एक उचित नाम दिया जाए। बीसवीं सदी के आठवें दशक के मध्य से नारीवादी विशेषज्ञों ने ‘पितृसत्ता’ शब्द का प्रयोग किया।
लड़की सांवली है, हमें तो चप्पल घिसनी पड़ेगी!

लड़की सांवली है, हमें तो चप्पल घिसनी पड़ेगी!

‘मैंने कई बार मां बाप के या परिजनों के मुंह से सुना है, अभागी काली लड़की| उसके इतने अच्छे नाक नक्श हैं, बस गोरी होती| इसके बाद मिलियन डॉलर का ऑफर आता है, कौन एक काली लड़की से शादी करेगा| उसके लिए अच्छा लड़का ढूंढना मुश्किल हो जाएगा|’
जेंडर से बनाई जाती है महिलाएं

‘जेंडर’ से बनाई जाती है महिलाएं

‘जेंडर’ सामाजिक-सांस्कृतिक संरचना है, जो स्त्रीत्व और पुरुषत्व के गुणों को गढ़ने के सामाजिक नियम व कानूनों का निर्धारण करता है।
आज क्यूँ ज़रूरी है नारीवाद?

आज क्यूँ ज़रूरी है नारीवाद?

औरतों और पुरुषों को बराबर मानने वाला और उनकी बराबरी के लिए लड़ने वाला हर इंसान फेमिनिस्ट कहलाता है| फेमिनिस्ट विचार यह नहीं है कि सत्ता के ढांचे को पलट दिया जाए बल्कि फेमिनिस्ट विचार यह है कि औरतों और पुरुषों के बीच सत्ता का संबंध ख़त्म हो जाए|
कविता: खेल सी ज़िन्दगी

कविता: खेल सी ज़िन्दगी

न जाने मैं कब इतनी बड़ी हो गयी, खेल-कूद, दौड़-भाग को भूल, जीवन के पतंग की लरी हो गयी

सोये रहोगे कब तक [Poem]

कौन रोक पायेगा उस ज्वाला को जो शुरू हुई थी एक चिंगारी कि तरह पर चली है आज जलाने को यह दुनिया किये बिना किसी रीती रिवाज़ कि परवाह

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H&M is the posterchild of sustainable fashion. In reality, it refuses to provide living wages to 850,000 workers around the world.
To Kill a Mockingbird

Gender Roles And Stereotyping In ‘To Kill A Mockingbird’

To Kill a Mockingbird covers several themes that are often uncomfortable to encounter and explore, such as racism and loss of innocence.
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On this Republic Day, let us take a look at the fifteen powerful women who helped draft the Indian Constitution.