अधिकारों की परिभाषा और इसकी अवधारणा के संबंध में, मैं जब भी अपने स्कूल से लेकर कॉलेज में इस विषय पर हुई पढ़ाई को याद करती हूँ तो अधिकार के नामपर सिर्फ शिक्षा, समानता और स्वतन्त्रता जैसे ढ़ेरों अधिकारों का नाम ही जहन में आता है| पर इन अधिकारों के बीच में कहीं भी अपने शरीर या यों कहें कि यौनिकता से जुड़े किसी भी अधिकार का ख्याल नहीं आता है| वास्तव में इस विषय को कभी भी हमें अपने अधिकार के रूप में बताया ही नहीं गया| और इसके चलते कहीं न कहीं यह विषय एक चुनौती बनता गया| नतीजतन जो लोग यौन स्वास्थ्य और अधिकारों के इस्तेमाल को आगे बढ़ाने वाले कार्यक्रमों और नीति का समर्थन करने के लिए अन्तर्राष्ट्रीय मानव अधिकारों का इस्तेमाल करते हैं, उन्हें कई चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है|

यौनिकता और यौन स्वास्थ्य के काम का समर्थन करने के लिए मानव अधिकारों के इस्तेमाल को अक्सर नैतिकता या संस्कृति का अपमान कहते हुए विरोध किया जाता रहा है| लेकिन नई और गौर करने वाली बात अब ये हुई है कि यौन अधिकारों के विरोध का तरीका बदल गया है| जहाँ क़ानूनी दायित्वों का विरोध करने के लिए यौन अधिकारों पर ‘परंपरा’, ‘नैतिकता’, ‘धर्म’ या ‘संस्कृति’ के दावों के नामपर कुछ हमले जारी हैं, वहीं अब यौन अधिकारों के विरोध के लिए इन तर्कों के साथ अधिकारों की भाषा को भी जोड़ दिया गया है|

यौन अधिकारों की दिशाएँ और विरोध के कई रूप हैं| विरोध का दायरा व्यापक है और इस तथ्य से जुड़ा हुआ है कि यौन अधिकारों की विषय-वस्तु विस्तृत है और इसका प्रजनन अधिकारों से गहरा नाता है| ‘यौन अधिकारों’ और ‘यौन व प्रजनन स्वास्थ्य और अधिकारों’, दोनों को बार-बार विवाद के विषय पर बताया जाता है कि ‘यौन अधिकार’ प्रजनन अधिकार के दायरे में आ सकते हैं लेकिन वे उनसे अलग है|

यौन अधिकार का मतलब ‘यौनिकता के मायने तय करना’

हमारा यह मानना है कि यौन अधिकार, लोगों को यह आज़ादी देते हैं कि वे निर्धारित करें कि उनकी यौनिकता के क्या मायने हैं और उसी सोच पर काम करें| उदाहरण के लिए, गर्भसमापन से संबंधित अधिकार, यौन अधिकारों के दायरे के अधिकार हैं, जब तक कि वे उन सेवाओं का हिस्सा हैं, जिनमें गर्भनिरोधक सेवाएं शामिल हैं और जो विषमलैंगिक यौन व्यवहार को प्रजनन से अलग रखकर देखता है| कुछ ऐसे प्रजनन अधिकार हैं, जैसे कि स्वस्थ मातृत्व और शिशु जन्म से संबंधित अधिकार, जिनका यौनिकता से कम संबंध है और इन्हें इस व्याख्या में चर्चा किये गये यौन अधिकारों के दायरे में शामिल नहीं किया गया है|

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संस्कार की भाषा में यौन अधिकारों का विरोध

आज भी कई सन्दर्भों में, यौन अधिकारों पर हमले (चाहे उन्हें औपचारिक रूप से किसी भी तरह से वर्गीकृत किया गया हो|) अक्सर नैतिकता या संस्कृति की भाषा में किये जाते हैं| इस विधा में मानव अधिकारों की भाषा को अप्रासंगिक माना जाता है या उसे पूरी तरह जेंडर संबंधों और विशेष रूप से विभिन्न समाजों को दावा की गई संस्कृतियों और परंपराओं के लिए एक नये और विनाशकारी दृष्टिकोण के उत्प्रेरक के रूप में हुए यौन स्वास्थ्य और अधिकारों के पैरोकारों ने अपने दावों को इस ओर केंद्रित किया कि अधिकार किस तरह कारगर हैं| यानी कि वे दर्शाते हैं कि मानव अपमानजनक व्यवहार से मुक्त होने के अधिकारों को यौन हिंसा के विरुद्ध सुरक्षा के लिए लागू किया जा सकता है और किया जाना चाहिए|

विरोध का एक स्वर : यौन अधिकार को मानवाधिकार न मानना

कई मायनों में इस मुद्दे पर लड़ाई कि ‘यौन अधिकार मानव अधिकार हैं’ या नहीं, एक विभाजनकारी रणनीति रही हैं| इसमें कोई संदेह नहीं है कि निष्पक्ष सुनवाई का अधिकार नहीं है, केवल इसीलिए कि निष्पक्ष सुनवाई का अधिकार शब्द किसी नागरिक और राजनीतिक अधिकारों पर अन्तर्राष्ट्रीय प्रसंविदा के अनुच्छेद में साफ़ रूप से नज़र नहीं आता या किसी अन्य संधि में उसे विशेष रूप से उद्घोषित नहीं किया गया है| हर इंसान इस बात से सहमत है कि इस तरह के अधिकार, विभिन्न और अनेक संबंधित अधिकारों से मिलने वाली सुरक्षा से मिलकर बनते हैं| इसी तरह यौन अधिकार शब्द अनेक मौजूदा अधिकारों को व्यक्त करने का सुविधाजनक संक्षिप्त रूप है, जिन्हें मानव के व्यक्ति और यौन स्वास्थ्य के एक पहलू के रूप में यौनिकता से संबंधित सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए आधिकारिक अंतर्राष्ट्रीय, क्षेत्रीय और राष्ट्रीय मानवाधिकार निकायों द्वारा लागू की गई कई संधियों में देखा जा सकता है| इस तरह लागू किये गये अधिकारों में – स्वास्थ्य के उच्चतम प्राप्य मानक के अधिकार, व्यक्ति की सुरक्षा, सूचना और अभिव्यक्ति, यातना, क्रूर, अमानवीय और अपमानजनक व्यवहार से मुक्ति और संबंध जोड़ने, जीवन, निजता और भेदभाव नहीं किये जाने के अधिकार शामिल है|

यौन अधिकार, लोगों को यह आज़ादी देते हैं कि वे निर्धारित करें कि उनकी यौनिकता के क्या मायने हैं और उसी दृढ़ संकल्प पर काम करें|

यौन अधिकारों को लेकर विवाद को हाल ही में उस तथाकथित विवादित तरीके में साफ़ कर दिया गया है, जिसमें अमेरिकी सरकार ने यौन अधिकारों को अपनाया है| सितंबर 2015 में संयुक्त राष्ट्र महिला कार्यकारी बोर्ड को दिए गये एक नीतिगत बयान में अमेरिका ने कहा है कि वह मानव अधिकार और विकास संबंधी चर्चाओं में ‘यौन अधिकार’ शब्द का इस्तेमाल करना शुरू कर देगी| कुछ पैरोकारों ने इस बयान को एक कदम आगे बढ़ाने के रूप में देखा गया|

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ख़ास तीन रंग वाले यौन अधिकार के विरोधी

यौन अधिकारों के विरोधियों ने तीन अलग-अलग आक्रमण शैलियों को उजागर किया हैं –

  1. लिखित रूप में होना – यह दावा कि संधियों में जो केवल लिखित रूप में मौजूद है, उनका ही अधिकार के रूप में दावा किया जा सकता है| 
  2. 2. अधिकार के दावों का प्रतिकार करना और
  3. 3. सार्वभौम को अधिकारों के एक पहलू के रूप में समझें जाने को बदलने का प्रयास करना| अन्य लेखकों ने धार्मिक तर्कों पर जोर दिया है|

अन्तर्राष्ट्रीय और क्षेत्रीय स्तर पर मानव अधिकार प्रणालियों का मानना है कि अधिकारों का उदभव, राज्यों की प्रकृति और उनकी राजनीति से जुड़ा हुआ है| यौनिकता, मानवता के हर क्षेत्र में है जिनके लिए हम अधिकार चाहते हैं और जो राजनीति के माध्यम से बनती है| लेकिन वहीं यह राजनीति के अधीन नहीं होना चाहती हैं| यौनिकता, यौन स्वास्थ्य और यौन विविधता के लिए काम करना, अधिकारों में सबसे खराब या सबसे अच्छी तरह की राजनीति को उजागर करने में समर्थ है|


यह लेख क्रिया संस्था के वार्षिक पत्रिका यौनिकता एवं अधिकार (2006 एवं 2017) से प्रेरित है| इसका मूल लेख पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करें|

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तस्वीर साभार : msnbc.com

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