आपने क्या सोचा, मैं मर जाऊंगी?

आपने क्या सोचा, मैं मर जाऊंगी?

हमारे समाज में स्त्रियों के अस्तित्व को ही सबसे अधिक नकारने की कोशिश की जाती है। उसका अस्तित्व पुरूष के अस्तित्व के साथ ही जोड़ कर रख दिया जाता है।
खतना की प्रथा है मानवाधिकार का उल्लंघन : सुप्रीम कोर्ट

खतना की प्रथा है मानवाधिकार का उल्लंघन : सुप्रीम कोर्ट

दाऊदी बोहरा मुस्लिम समुदाय की नाबालिग लड़कियों के खतना की प्रथा को चुनौती देने वाली याचिका पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई|
क्या सेनेटरी पैड का टैक्स फ्री होना काफ़ी है? | Feminism In India

क्या सेनेटरी पैड का टैक्स फ्री होना काफ़ी है?

आखिरकार पूरे एक साल तक नारिवादिओं, सामाजिक कार्यकर्ताओं, छात्र-छात्राओं, शिक्षकों और डॉक्टर्स के विरोध के बाद सरकार ने सेनेटरी पैड पर लगाये 12 फीसद टैक्स को हटा दिया|
औरतों की अनकही हसरतें खोलती है लस्ट स्टोरी | Feminism In India

औरतों की अनकही हसरतें खोलती है ‘लस्ट स्टोरी’

लस्ट स्टोरी समाज के अलग-अलग तबके में आधी आबादी के उस आधे किस्से को बयाँ करती है जिसे हमेशा चरित्रवान और चरित्रहीन के दायरें में समेटा गया है|
‘माँ-बहन’ वाली गंदी भाषा से बढ़ रही है महिला हिंसा | Feminism In India

‘माँ-बहन’ वाली गंदी भाषा से बढ़ रही है महिला हिंसा

महिलाओं के जिन स्वरूपों को हमारी संस्कृति में पूजनीय बताया गया है, हम किसी भी बहस, लड़ाई-झगड़े या कई बार आम बोलचाल में इन्हीं रूपों पर केंद्रित गंदी-भद्दी गालियाँ भी बोलते है और इन गालियों का संबंध होता है सिर्फ महिलाओं की ‘योनि’ से|
ख़ास बात : भारत की पहली स्लाइड गिटारवादिका विदुषी डॉ कमला शंकर के साथ

ख़ास बात : भारत की पहली स्लाइड गिटारवादिका विदुषी डॉ कमला शंकर के साथ

भारत की पहली स्लाइड गिटारवादिका विदुषी डॉ कमला शंकर पूरी दुनिया में अपनी बहुमुखी प्रतिभा और गिटारवादन का लोहा मनवा चुकी हैं|
पीरियड के मिथक तोड़ने की सशक्त पहल | Feminism In India

पीरियड के मिथक तोड़ने की सशक्त पहल

लयला अपनी कला को सरोकार से जोड़कर एक नया रूप देना चाहती है| उन्होंने अपनी कला के लिए एक ऐसे विषय को चुना है, जिसे आमतौर पर हमारे समाज में वर्जित माना जाता है, यानी कि मासिकधर्म या पीरियड|
गोरेपन की क्रीम का असर चेहरे से ज्यादा हमारी रंगभेदी संकीर्ण सोच पर | Feminism In India

गोरेपन की क्रीम का असर चेहरे से ज्यादा हमारी रंगभेदी संकीर्ण सोच पर

एशिया और खासकर भारत जैसे देश में जहां लोग स्वाभाविक रूप से काले या सांवले रंग के होते हैं वहां गोरे रंग को लेकर पागलपन खतरनाक है।
लड़कियों के लिए आज भी बुरा समझा जाता है नर्स बनना | Feminism In India

लड़कियों के लिए आज भी बुरा समझा जाता है नर्स बनना

ग्रामीण परिवेश में आज भी नर्स बनने के लिए लड़कियों की चुनौती सालों पहले फ्लोरेंसे नाइटेंगल जैसी ही है, जिनके लिए समय कभी अनुकूल रहा ही नहीं|
दिल्ली का एकतरफा 2021 मास्टर प्लान | Feminism In India

दिल्ली का एकतरफा 2021 ‘मास्टर प्लान’

मास्टर प्लान बड़ा सटीक चुनाव है| बस जरुरत है अनियोजियत या फिर समयाभाव से जूझते हुए ही सही ज़मीन पर काम करने वाले सभी साथिओ को आगे आकर, एकजुट होकर आधी आबादी और हर वर्ग की हिस्सेदारी इस योजना में शामिल करने की|

What's Trending On FII?

School Dress Codes Sexualise Girls And Objectify Their Bodies

Why Do School Dress Codes End Up Sexualising Young Girls?

School dress codes teaches girls to take shame in their bodies and treat it as not something natural, but something that is deeply shameful.
Kittur Rani Chennamma leading the battle

Rani Kittur Chennamma: India’s Valiant Freedom Fighter | #IndianWomenInHistory

Kittur Chennamma, queen of Kittur, was an Indian ruler to lead an armed rebellion against the British East India Company. Even though her attempt failed, she was an inspiration for the upcoming freedom fighters.
औरत के ओर्गेज्म की बात पर हम मुंह क्यों चुराते हैं? | Feminism In India

औरत के ‘ओर्गेज्म’ की बात पर हम मुंह क्यों चुराते हैं?  

कई ऐसे रिसर्च बताते हैं कि 62 फीसद महिलाओं को ओर्गेज्म मास्टरबेशन के वक्त आता है। ओर्गेज्म भी दूसरे सामान्य और प्राकृतिक प्रक्रियाओं का ही एक हिस्सा है। स्वास्थ्य पर इसका सीधा असर है।