पीरियड पर चुप्पी की नहीं चर्चा की ज़रूरत है | Feminism In India

पीरियड पर चुप्पी की नहीं चर्चा की ज़रूरत है

मासिकधर्म पर बनी हमारी इस शर्म और चुप्पी को तोड़ने की बेहद ज़रूरत है| वरना हम न तो किसी भी संसाधन या सुविधा तक पहुंच सकेंगें |
फैमिली ग्रुप्स के अश्लील व्हाट्सएप्प मेसेज – एक विश्लेषण | Feminism In India

फैमिली ग्रुप्स के अश्लील व्हाट्सएप्प मेसेज – एक विश्लेषण

आजकल फैमिली ग्रुप में अपने बड़े-बूढ़े और रिश्तेदारों की तरफ से शेयर किये जाने वाले कुछ उन चुनिन्दा भद्दे व्हाट्सएप्प मेसेज के बारे बात करने जा रही हूँ, जो महिलाओं के प्रति व उनसे बनाये जाने वाले रिश्ते के प्रति की अपनी घिनौनी सोच को साझा करते हैं|
महिला उत्पीड़न की पहली जगह है घर | Feminism In India

महिला उत्पीड़न की पहली जगह है घर

हम बेटा पैदा होने पर तो नहीं बोलते की ‘देवता आया है’ तो बेटी को दिव्य क्यों बनाते हैं?  क्या इसलिए ताकि हम उसे हमेशा देवी के ढोंग के तले उसे उसके मानव अधिकारों से वंचित रखें?
देवी की माहवारी 'पवित्र’ और हमारी ‘अपवित्र?’ | Feminism In India

देवी की माहवारी ‘पवित्र’ और हमारी ‘अपवित्र?’

आषाढ़ के महीने में गुवाहाटी के कामाख्या मंदिर की देवी को माहवारी होती है। देवी को होने वाली इस सालाना माहवारी का भक्त पूरे साल इंतज़ार करते हैं।
पूंजीवादी पितृसत्ता करती है पुरुष पर वार | Feminism In India

पूंजीवादी पितृसत्ता करती है पुरुष पर वार

एक तरफ तो पूंजीवादी पितृसत्ता सामाजिक रूप से दबाव डालने की कोशिश में है और दूसरे की क्षमताओं के दमन की कोशिश में|
बलात्कारी को फांसी देने से मिल जायेगा पीड़ित को न्याय? | Feminism In India

बलात्कारी को फांसी देने से मिल जायेगा पीड़ित को न्याय?

बलात्कारी को फांसी की सजा देने के अध्यादेश बनने पर हर तरफ जीत का जश्न मनाया जा रहा है जैसे कि रेप ख़त्म करने का ब्रह्मास्त्र मिल गया हो? क्या सच में ये जीत जैसा है, हमें इसपर सोचने की ज़रूरत है| 
इसे नारीवाद ही क्यों कहते हैं, समतावाद या मानववाद क्यों नहीं?

इसे नारीवाद ही क्यों कहते हैं, समतावाद या मानववाद क्यों नहीं?

नारीवाद पर विश्वास करने वालों को अक्सर इस बहस का सामना करना पड़ता है कि जब ‘नारीवाद’ का मूलभाव समानता है तो इसे ‘मानवतावाद’ या फिर ‘समतावाद’ क्यों नहीं कहा जाता है|
आज भी जिन्दा है परिवार में स्त्री-मुक्ति के सवाल | Feminism In India

आज भी जिन्दा है परिवार में स्त्री-मुक्ति के सवाल

परिवार के यथार्थ में स्त्री के मुक्ति के सवालों पर पितृसत्तात्मक समाज इसमें भी औरत को ही दोषी मानता है। औरत को खुद ही उसकी हालत के लिए जिम्मेदार माना गया है|
अंग्रेजी भाषा में क्यों सिमटी हैं यौनिकता? | Feminism In India

अंग्रेजी भाषा में क्यों सिमटी हैं ‘यौनिकता’?

दुर्भाग्यवश यौनिकता पर ज़्यादातर सामग्री अंग्रेज़ी में ही मिलती है और हमें अपनी भाषा में उसे जानने समझने के लिए अनुवाद पर निर्भर होना पड़ता है।
9 नारीवादी लेखिकाओं के लेखन से समझें नारीवाद | Feminism In India

9 नारीवादी लेखिकाओं के लेखन से समझें नारीवाद

इन नारीवादी लेखिकाओं ने अपने लेखन के माध्यम से अपने-अपने देशकाल को ध्यान में रखकर नारीवाद की एक वृहत परिभाषा को गढ़ा, जो हमें नारीवाद को समझने में बेहद मददगार साबित होती है|

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5 Indian Women Historians You Need To Know About | Feminism In India

5 Indian Women Historians You Need To Know About

It’s important to learn about women historians who have increasingly influenced our understanding of the world and its history.
6 Bollywood Characters You Didn’t Know Were Feminist | Feminism In India

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Can on-screen feminism go beyond the abla naari turned Kali maa? Let’s meet some subtler Bollywood characters who were feminists.
How Biological Determinism Perpetuated Sexism Through Science

How Biological Determinism Perpetuates Sexism Using ‘Science’

Biological determinism, by definition, refers to the ''idea that all human behaviour is innate, determined by genes, brain size, or other