9 नारीवादी लेखिकाओं के लेखन से समझें नारीवाद

इन नारीवादी लेखिकाओं ने अपने लेखन के माध्यम से अपने-अपने देशकाल को ध्यान में रखकर नारीवाद की एक वृहत परिभाषा को गढ़ा, जो हमें नारीवाद को समझने में बेहद मददगार साबित होती है|

सावित्रीबाई फुले: ज़माने को बदला अपने विचारों से

ज्योतिबा और सावित्रीबाई ने दलितों को शिक्षा में हिस्सेदार बनाया। दलित लड़कियों के लिए ज्योतिबा ने स्कूल खोला। इसमें टीचर बनीं सावित्रीबाई। 1848 से 1851 तक ऐसे 18 स्कूल खोले गए।

7 Times Media Coverage of Rio Olympics was Sexist and It’s...

Women athletes from all over the world are crushing it at Rio Olympics 2016, but global media is still showing us that sexism is alive and well, kicking. Yes, this is 2016.

प्लास्टिक सेनेटरी पैड का खतरनाक खेल | #ThePadEffect

भारत में उपलब्ध सेनेटरी पैड प्लास्टिक के बने होते है और इन्हें बनाने में इस्तेमाल की जाने वाली सामग्री गैर-बायोडिग्रैडबल होती है|

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Kerala's Casteist Breast Tax And The Story Of Nangeli

Kerala’s Casteist Breast Tax And The Story Of Nangeli

Imagine paying a tax to cover your breasts? Kerala women once did.
Why Has Social Media Made It 'Cool' To Have Mental Illnesses?

Why Has Social Media Made It ‘Cool’ To Have Mental Illnesses?

Mental illnesses are real illnesses that have a harsh reality and are not tools to show off your ‘quirky’ personality on social media.
लैंगिक समानता : क्यों हमारे समाज के लिए बड़ी चुनौती है? | Feminism In India

लैंगिक समानता : क्यों हमारे समाज के लिए बड़ी चुनौती है?

गाँव हो या शहर व्यवहार से लेकर काम तक लैंगिक समानता हमारे समाज में मौजूद है, जो हमारे देश के लिए एजेंडा 2030 को पूरा करने में बड़ी चुनौती है|

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